युवा हिंद ट्रस्ट का तर्क
“अगर अतीत की राजशाही आरक्षण से बाहर करने का आधार नहीं बन सकती,
तो वर्तमान की गरीबी भी आरक्षण से बाहर रखने का आधार नहीं बननी चाहिए।”
विशेष रिपोर्ट | सामाजिक न्याय पर बड़ा सवाल
जब वंश राजसी हो, पर पेट खाली हो — तब आरक्षण किस आधार पर तय होता है?
युवा हिंद ट्रस्ट के हवाले से विशेष रिपोर्ट
आज भारत के सामाजिक ढांचे में एक ऐसा सवाल खड़ा हो चुका है, जिस पर न तो सत्ता खुलकर बोलती है और न ही समाज ईमानदारी से चर्चा करता है। सवाल सीधा है, लेकिन बेहद गहरा—
क्या आरक्षण का आधार केवल इतिहास और जाति है, या वर्तमान की गरीबी, संघर्ष और सामाजिक पिछड़ापन भी?
एक तरफ सिसोदिया राजपूत वंश जैसे सवर्ण समाज के हजारों परिवार हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि उनके बच्चे सब्जी बेचने, ठेला लगाने और मजदूरी करने को मजबूर हैं। दो वक्त की रोटी के लिए जूझते ये परिवार सिर्फ इस कारण आरक्षण से बाहर हैं क्योंकि उनके पूर्वज कभी राजा थे।
वहीं दूसरी ओर, इतिहास में राजशाही, साम्राज्य और सत्ता का संचालन करने वाले कई वंश आज SC, EBC और OBC की श्रेणी में हैं और उन्हें संवैधानिक आरक्षण प्राप्त है।
तो सवाल उठता है—
👉 आरक्षण की व्यवस्था आखिर किन आधारों पर तय की गई?
👉 क्या वंश, इतिहास और वर्तमान हालात के बीच संतुलन नहीं होना चाहिए?
👉 क्या सवर्ण समाज की गरीबी संविधान की नजर में अदृश्य है?
गोप वंश: राजशाही, प्रतिरोध और इतिहास का दबा हुआ अध्याय
भारत का इतिहास सिर्फ राजपूतों और मुगलों तक सीमित नहीं रहा। गोप वंश, जिसे सोमवंशी या यदुवंशी कहा जाता है, आर्य परंपरा के सबसे प्राचीन वंशों में से एक रहा है। यही कारण है कि आज भी भारत सरकार गोप, सदगोप, अहीर, ग्वाल को यादव श्रेणी में मान्यता देती है और इन्हें एक-दूसरे का पर्याय बताती है।
बंगाल की गोप भूमि: एक भूला हुआ साम्राज्य
ब्रिटिश काल की Bengal Presidency में आज भी चार जिले—
दुर्गापुर, मिदनापुर, बर्धमान और बीरभूम — गोप भूमि के नाम से जाने जाते हैं।
गोप समुदाय में जो राजा बने, वही सदगोप कहलाए।
Bengal Gazetteer में सदगोपों को कुलीन गोप और उच्च कुल का गोप बताया गया है।
राजा हरिवंश नारायण सिंह: अंग्रेजों को चुनौती देने वाला यादव शासक
दुर्गापुर के सदगोप यादव शासक महाराज हरिवंश नारायण सिंह ने 1885 में British East India Company के खिलाफ खुली बगावत कर दी थी।
इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि—
महाराज ने 15 अंग्रेज अधिकारियों को मारकर काली माता को चढ़ाया
1890 में British Viceroy ने उनके खिलाफ official warrant जारी किया
इस warrant में उनके legal encounter का आदेश था
युद्ध में वीरगति पाने वाले राजा के परिवार को पकड़वाने पर 10 British gold coins का इनाम घोषित किया गया
उनके साम्राज्य का क्षेत्रफल 22,541 वर्ग किलोमीटर था —
यानी आधुनिक हरियाणा राज्य के लगभग आधे क्षेत्रफल के बराबर।
“यादव टाइटल 1920 के बाद लिया गया” — इस झूठ का जवाब इतिहास देता है
कुछ लोग यह दावा करते हैं कि सदगोपों ने 1920 के बाद यादव उपनाम अपनाया।
लेकिन 1890 का ब्रिटिश warrant इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।
इतिहास, गजेटियर और ब्रिटिश दस्तावेज साफ कहते हैं—
👉 सदगोप = यादव = गोप
1901 की जनगणना में यह भी दर्ज है कि सदगोप समुदाय ने गौपालन छोड़कर कृषि को अपनाया।
Anthropological Survey of India के अनुसार—
“Sadgop का अर्थ है कुलीन गोप, जिनका मूल निवास गोपभूमि था।”
राजमहल, मंदिर और वैवाहिक संबंध
Bengal Presidency में आज भी कई महल और मंदिर सदगोप यादव शासकों द्वारा निर्मित हैं।
Cooch Behar का Durga House इसी राजवंश की देन है।
इस राजघराने का वैवाहिक संबंध बिहार की नजरगंज रियासत (मजराउठ यादव, मधुवंशी/यदुवंशी) से रहा है।
आज इस वंश के कई वंशज America और France में बसे हुए हैं।
कुंवर रोहित सिंह यदुवंशी, इसी राजघराने के वंशज हैं, जो फ्रांस में settled हैं।
तो फिर सवाल वही है…
अगर यादव, सदगोप, अहीर जैसे राजवंशों को पिछड़ेपन के आधार पर OBC में रखा जा सकता है,
तो—
❓ सिसोदिया, राजपूत , ब्राह्मण, भूमिहार या अन्य सवर्ण समाज के गरीब परिवारों को क्यों नहीं?
❓ क्या सिर्फ ऐतिहासिक राजशाही आज के भूखे बच्चे की सजा बन जानी चाहिए?
❓ क्या आरक्षण को अब आर्थिक और सामाजिक वास्तविकता के आधार पर पुनर्परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए?
युवा हिंद ट्रस्ट की अपील
“सामाजिक न्याय का अर्थ यह नहीं कि किसी को इतिहास के कारण हमेशा वंचित रखा जाए और किसी को हमेशा लाभ दिया जाए। न्याय वह है, जो वर्तमान पीड़ा को देखे।”
आज जरूरत है—
ईमानदार सामाजिक बहस की
सवर्ण गरीबों की पीड़ा को स्वीकार करने की
और आरक्षण की नीति को मानवता, समानता और वर्तमान हालात के अनुरूप ढालने की
(यह रिपोर्ट इतिहास, दस्तावेजों और सामाजिक यथार्थ पर आधारित है।)
.क्या भारत में गरीब होना अपराध है, अगर आप सवर्ण हैं?
आज का भारत एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है।
यहाँ गरीबी देखी नहीं जाती, जाति देखी जाती है।
यहाँ पेट की भूख नहीं, पूर्वजों का इतिहास तय करता है कि आप हकदार हैं या नहीं।
सिसोदिया राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थ—
इन समाजों के भीतर आज लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके पास—
न ज़मीन बची
न रोज़गार
न शिक्षा के संसाधन
फिर भी उन्हें सिर्फ इसलिए आरक्षण से बाहर रखा गया क्योंकि कभी उनके पूर्वज सत्ता में थे।
👉 सवाल यह है कि क्या संविधान मृत इतिहास के आधार पर जिंदा इंसान का भविष्य तय करता है?
आरक्षण की मूल भावना क्या थी — और आज क्या बन गई है?
संविधान निर्माताओं ने आरक्षण को—
स्थायी अधिकार नहीं,
बल्कि अस्थायी सामाजिक सुधार के रूप में देखा था
डॉ. भीमराव अंबेडकर का स्पष्ट मत था कि—
“जब सामाजिक असमानता समाप्त हो जाएगी, तब आरक्षण की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।”
लेकिन आज—
आरक्षण राजनीतिक वोट बैंक बन चुका है
पिछड़ापन वंशानुगत प्रमाण पत्र हो गया है
और गरीबी गणना से बाहर की सच्चाई
यादव समाज का उदाहरण: जब राजा भी पिछड़ा बना
यादव / गोप / सदगोप समाज इस बहस का सबसे सशक्त उदाहरण है।
इतिहास कहता है—
गोप वंश प्राचीन आर्य वंश है
सदगोप राजा बने
साम्राज्य चलाया
अंग्रेजों से लड़े
बलिदान दिया
फिर भी—
समय बदला
सत्ता छीनी गई
संसाधन खत्म हुए
शिक्षा से दूरी बनी
👉 परिणाम:
राजाओं के वंशज खेतिहर, मजदूर और सामाजिक रूप से पिछड़े बन गए।
यही कारण है कि—
भारत सरकार ने
गोप, सदगोप, अहीर, ग्वाल को
यादव (OBC) श्रेणी में रखा।
👉 यानी इतिहास नहीं, वर्तमान पिछड़ापन निर्णायक बना।
तो यही न्याय सवर्ण गरीबों के लिए क्यों नहीं?
अगर—
यादव समाज को राजवंश होने के बावजूद OBC माना जा सकता है
सदगोप राजाओं के वंशजों को पिछड़ा स्वीकार किया जा सकता है
तो फिर—
❓ सिसोदिया राजपूत का सब्जी बेचने वाला बच्चा
❓ ब्राह्मण का मजदूरी करता बेटा
❓ भूमिहार का ठेले पर जीवन बिताता परिवार
किस अपराध की सजा भुगत रहा है?
👉 सिर्फ इस अपराध की कि उसके पूर्वज राजा थे?
एक असहज लेकिन जरूरी सवाल
क्या यह सामाजिक न्याय है कि—
एक अमीर OBC को आरक्षण मिले
और एक गरीब सवर्ण को कोई सहारा न हो?
क्या यह लोकतंत्र है कि—
जाति प्रमाण पत्र भविष्य तय करे
और गरीबी मजाक बन जाए?
युवा हिंद ट्रस्ट का स्पष्ट स्टैंड
युवा हिंद ट्रस्ट मानता है कि—
“आरक्षण का विरोध नहीं,
अन्याय का विरोध होना चाहिए।”
ट्रस्ट की मांग है कि—
आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन को संयुक्त रूप से देखा जाए
सवर्ण गरीबों को भी प्रभावी संवैधानिक संरक्षण मिले
आरक्षण की नीति की नियमित समीक्षा हो
इतिहास के गौरव को वर्तमान की भूख से ऊपर न रखा जाए
यह लड़ाई किसी जाति के खिलाफ नहीं, अन्याय के खिलाफ है
यह रिपोर्ट—
यादव बनाम राजपूत नहीं है
OBC बनाम सवर्ण नहीं है
यह रिपोर्ट है—
👉 गरीब बनाम व्यवस्था
👉 भूखे बनाम इतिहास
👉 वर्तमान बनाम जड़ सोच
अंतिम सवाल (जो हर भारतीय को खुद से पूछना चाहिए)
अगर आपका बच्चा भूखा है,
तो क्या उसे यह बताया जाएगा कि—
“तुम्हारे पूर्वज राजा थे, इसलिए तुम्हें मदद नहीं मिलेगी”?
अगर हाँ—
तो यह व्यवस्था सामाजिक न्याय नहीं, सामाजिक क्रूरता है।
जय श्री कृष्ण 🙏
(इतिहास गवाह है, सवाल जिंदा हैं)
इतिहास का सच: वे राजा जिनके वंशज आज आरक्षित वर्ग में हैं
1️⃣ यादव / गोप / अहीर — राजवंश से OBC तक
इतिहास
कृष्ण स्वयं यदुवंशी (सोमवंशी) थे
महाभारत काल से लेकर मध्यकाल तक यादवों ने:
मथुरा
द्वारका
देवगिरि (यादव वंश, महाराष्ट्र)
बंगाल (सदगोप यादव)
में राज किया
फिर OBC क्यों बने?
मुस्लिम व अंग्रेजी काल में सत्ता छिनी
सामंती संरचना टूटी
गौपालन → कृषि/मजदूरी
शिक्षा व प्रशासन से बहिष्कार
👉 इसलिए भारत सरकार ने यादव, अहीर, ग्वाल, गोप, सदगोप को OBC माना
साफ संदेश:
👉 राजा होना पिछड़ेपन से बचने की गारंटी नहीं था
2️⃣ जाट — शासक भी, फिर भी OBC (कई राज्यों में)
इतिहास
भरतपुर के जाट राजा (महाराजा सूरजमल)
पश्चिमी UP, हरियाणा, राजस्थान में जाट रियासतें
मुगलों को कई बार युद्ध में हराया
आज स्थिति
राजस्थान, UP, दिल्ली, MP आदि में OBC
कारण:
भूमि सुधारों के बाद आर्थिक गिरावट
औद्योगिक/शैक्षणिक पिछड़ापन
👉 इसलिए “राजा थे” तर्क यहाँ भी असफल हो जाता है
3️⃣ कुर्मी / कुशवाहा — मौर्य सम्राट का वंश
इतिहास
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य
सम्राट अशोक
मौर्य = कुशवाहा/कुर्मी परंपरा
फिर OBC क्यों?
राजशाही खत्म
कृषि आधारित समाज
सामाजिक प्रतिनिधित्व शून्य
👉 आज कुर्मी-कुशवाहा OBC हैं
4️⃣ निषाद / मल्लाह — जल साम्राज्य के राजा
इतिहास
रामायण में राजा निषादराज गुह
गंगा–यमुना जलमार्ग के शासक
स्वतंत्र राज्य और कर प्रणाली
आज
नाविक, मछुआरे
सामाजिक उपेक्षा
शिक्षा से वंचना
👉 आज निषाद / मल्लाह OBC / EBC में
5️⃣ गोंड — आदिवासी लेकिन सम्राट
इतिहास
गोंडवाना साम्राज्य
रानी दुर्गावती
मध्य भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी राज्य
आज
ST (अनुसूचित जनजाति)
जंगलों से विस्थापन
सत्ता और संसाधन दोनों छिने
👉 राजा होने के बावजूद आरक्षित वर्ग
6️⃣ पासी — राजा बिजलदेव का वंश (आज SC)
इतिहास
उत्तर भारत में पासी राजाओं का शासन
लखनऊ–हरदोई क्षेत्र
किले और प्रशासन
फिर SC क्यों?
सामाजिक अपमान
भूमि छिनना
वर्ण व्यवस्था में नीचे धकेले गए
👉 आज पासी Scheduled Caste
7️⃣ नाई (सैनी/हजाम) — शाही प्रशासन का हिस्सा
इतिहास
कई राज्यों में नाई राजदरबार के:
मंत्री
सेनापति
गुप्तचर
थे
आज
OBC
परंपरागत पेशे तक सीमित
इतिहास से निकला निष्कर्ष (बहुत महत्वपूर्ण)
👉 भारत में आरक्षण का आधार यह कभी नहीं रहा कि आपके पूर्वज राजा थे या नहीं।
👉 आधार रहा:
सत्ता का छिन जाना
शिक्षा से दूरी
सामाजिक अपमान
लंबे समय तक अवसरों की कमी
इसीलिए—
यादव राजा होकर भी OBC
गोंड सम्राट होकर भी ST
पासी राजा होकर भी SC
तो फिर सवर्ण गरीबों के साथ भेदभाव क्यों?
जब—
इतिहास वाले राजा भी आरक्षित हो सकते हैं
तो—
❓ आज का भूखा सवर्ण बच्चा क्यों नहीं?
❓ क्या गरीबी जाति देखकर आती है?
❓ क्या संविधान केवल कुछ इतिहासों को ही मान्यता देता है?
युवा हिंद ट्रस्ट का तर्क
“अगर अतीत की राजशाही आरक्षण से बाहर करने का आधार नहीं बन सकती,
तो वर्तमान की गरीबी भी आरक्षण से बाहर रखने का आधार नहीं बननी चाहिए।”
