दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University – DU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला एक छात्रा Chitra Rajput से जुड़ा है, जिसके द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो ने विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रोफेसरों और आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔹 मामला शुरू कैसे हुआ?
दिसंबर 2025 के दूसरे सप्ताह में Chitra Rajput नाम की एक छात्रा ने Instagram पर एक वीडियो/रील पोस्ट की। इस वीडियो में उसने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक विभाग में कुछ प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष (HOD) छात्रों पर अनुचित दबाव बनाते हैं।
छात्रा का दावा है कि उसने जब इस व्यवहार के खिलाफ आवाज़ उठाई और वीडियो साझा किया, तो उस पर वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि उसने ऐसा नहीं किया तो उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा।
🔹 छात्रा के मुख्य आरोप
Chitra Rajput ने अपने वायरल वीडियो में आरोप लगाया कि:
- कुछ प्रोफेसर छात्रों को नंबर और आंतरिक मूल्यांकन (Internal Marks) के नाम पर दबाव में रखते हैं
- उसे HOD द्वारा प्रोफेसर के कमरे में जाने को कहा गया
- वीडियो हटाने से इनकार करने पर एडमिट कार्ड रोकने जैसी बातें कही गईं
- कुछ छात्रों पर प्रशासन का पक्ष लेने का भी आरोप लगाया गया
🔹 सोशल मीडिया पर क्यों भड़का विवाद?
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, Instagram, Facebook और YouTube पर यह मामला तेजी से फैल गया।
कुछ लोग छात्रा के समर्थन में सामने आए और इसे छात्रों की आवाज़ बताया, वहीं कुछ यूज़र्स ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाए कि:
- क्या विश्वविद्यालय में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रभावी है?
- क्या छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिल रहा है?
🔹 DU प्रशासन की स्थिति
अब तक दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
हालाँकि, लगातार बढ़ते दबाव के बीच यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।
🔹 कानूनी स्थिति
यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि:
- फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों पर आधारित है
- किसी भी प्रोफेसर या अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है
- जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी
🔍 निष्कर्ष
Chitra Rajput का यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, छात्र सुरक्षा और आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब निगाहें दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद पर क्या कदम उठाता है।
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