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पत्रकार को मिली बेवाक पत्रकारिता की सजा, प्रशासन द्वारा सच्चाई को दबाने की की जा रही कोशिश

बिहार के मधुबनी जिला क्षेत्र अंतर्गत लौकही थाना क्षेत्र की पुलिस व प्रशासन की बर्बरता सुन आप हैरान हो जाएंगे
12 February 2025 by
पत्रकार को मिली बेवाक पत्रकारिता की सजा, प्रशासन द्वारा सच्चाई को दबाने की की जा रही कोशिश
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पत्रकार को मिली बेवाक पत्रकारिता की सजा, प्रशासन द्वारा सच्चाई को दबाने की की जा रही कोशिश

बिहार के मधुबनी जिला क्षेत्र अंतर्गत लौकही थाना क्षेत्र की पुलिस व प्रशासन की बर्बरता सुन आप हैरान हो जाएंगे । इनके एक नहीं बल्कि हजारों कारनामें आपको सुनने मिलेंगे । बिहार सरकार यानी सुशासन की सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर ले परन्तु उनके सारे दावे फेल होते दिख रहे है।

पत्रकार को मिली बेवाक पत्रकारिता की सजा, प्रशासन द्वारा सच्चाई को दबाने की की जा रही कोशिश

बिहार के मधुबनी जिले के लौकही थाना क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की बर्बरता की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। इस क्षेत्र में कई गंभीर मुद्दों का सामना किया जा रहा है, और यहां की स्थिति इतनी गंभीर है कि हजारों ऐसे मामले हैं जो सार्वजनिक ध्यान की आवश्यकता रखते हैं। बिहार सरकार, जिसे सुशासन की सरकार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, के दावों की वास्तविकता कुछ और ही है। जब पत्रकार इस प्रकार के मुद्दों पर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें पहले धमकी दी जाती है और फिर उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।

इस संदर्भ में, द्रौपदी देवी का मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। द्रौपदी देवी ने लौकही प्रखंड के अंचल कार्यालय परिसर में विभिन्न मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया। आरोप है कि 10 फरवरी 2025 को उन्हें जबरन उठाया गया और उनके साथ मारपीट की गई। जब उनके पति रामसेवक यादव और अन्य समर्थकों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन पर भी अत्याचार किया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी सत्यता की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, और यह एक गंभीर जांच का विषय है।

इसके अतिरिक्त, थानाध्यक्ष रौशन कुमार पर आरोप है कि उन्होंने पैसे लेकर एफ.आई.आर. दर्ज की और अंचलाधिकारी तथा अन्य कर्मचारियों ने गलत सबूत पेश किए। एक घायल व्यक्ति को अस्पताल में उचित चिकित्सा नहीं दी गई, जबकि उसे गंभीर चोटें आई थीं। पत्रकार राहुल कुमार प्रियदर्शी ने इस मामले को निष्पक्षता से कवर किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें धमकी दी गई। इसके बाद, लौकही प्रखंड के विकास पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने उन्हें फोन कॉल के माध्यम से डराने-धमकाने का प्रयास किया।

इस मामले में कई पत्रकारों और धरनार्थियों पर झूठे आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पत्रकारों ने इस बात पर जोर दिया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सीसीटीवी फुटेज की जांच से सच सामने आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और वे न्याय की प्राप्ति की आशा करते हैं।

पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफ.आई.आर. में सुधार नहीं किया गया, तो उनका संगठन भूख हड़ताल करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने सभी पत्रकार संगठनों से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लें और एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ खड़े हों। यह स्पष्ट है कि लौकही प्रशासन चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश कर रहा है, और ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है।

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