🔴 बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर उतरा हिंदू समाज, वीएचपी–बजरंग दल ने प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस का किया पुतला दहन
✍️ विशेष संवाददाता | अंतरराष्ट्रीय / सामाजिक सरोकार
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमले, लूट, आगजनी, मंदिरों के अपमान और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं ने पूरे हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। इन्हीं घटनाओं के विरोध में भारत के विभिन्न हिस्सों में आक्रोश फैलता जा रहा है।
इसी क्रम में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार पर धार्मिक उत्पीड़न को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन किया।
📸 तस्वीरों में दिखा जनाक्रोश
प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि:
सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे
हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां थीं
“बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या बंद करो” जैसे नारे लगाए गए
प्रतीकात्मक रूप से प्रधानमंत्री यूनुस का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया गया
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश बेहद कठोर और भावनात्मक था।
🔥 बांग्लादेश में क्या हो रहा है?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बांग्लादेश में:
हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है
हिंदू परिवारों की संपत्तियों पर कब्जा किया जा रहा है
जबरन पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है
पुलिस और प्रशासन आंखें मूंदे हुए हैं
स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में कई हिंदू गांवों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
⚠️ सरकार पर गंभीर आरोप
वीएचपी और बजरंग दल के नेताओं ने कहा कि:
“प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की सरकार में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सुनियोजित धार्मिक उत्पीड़न है।”
उनका कहना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बना, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
🇮🇳 भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से मांग की कि:
बांग्लादेश के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की जाए
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों में मुद्दा उठाया जाए
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए ठोस गारंटी ली जाए
पीड़ित हिंदू परिवारों को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मिले
🌍 वैश्विक संदर्भ और तुलना
प्रदर्शन के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि:
जब अन्य देशों में अपने नागरिकों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाते हैं
तब हिंदुओं के मामले में वैश्विक चुप्पी क्यों?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मानवाधिकार का मुद्दा है, न कि किसी एक देश या धर्म का।
🗣️ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन में शामिल एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा:
“यह लड़ाई किसी राजनीति की नहीं, बल्कि अस्तित्व की है। बांग्लादेश में रहने वाला हर हिंदू आज डर के साए में जी रहा है।”
🔚 निष्कर्ष
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ यह प्रदर्शन केवल एक घटना नहीं, बल्कि उभरते जनआक्रोश की चेतावनी है। अब यह देखना अहम होगा कि:
बांग्लादेश सरकार क्या कदम उठाती है
भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं
हिंदू समाज की निगाहें अब ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं।









