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Daroga Se DSP Tak: Babubarhi Ki Beti Krishna Kumari Ne Racha Itihas, Lekin Samaj Se Ek Bada Sawaal Bhi!

महेशवाड़ा पंचायत के बेला गांव की बेटी कृष्णा कुमारी ने 70वीं BPSC परीक्षा में DSP बनकर बढ़ाया मिथिलांचल का मान, संघर्ष के दिनों में सहयोग और सफलता के बाद मिलने वाली बधाइयों पर छिड़ी चर्चा
22 June 2026 by
Daroga Se DSP Tak: Babubarhi Ki Beti Krishna Kumari Ne Racha Itihas, Lekin Samaj Se Ek Bada Sawaal Bhi!
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"संघर्ष में साथ देने वाले कम होते हैं, सफलता में बधाई देने वाले हजारों। सवाल यह है कि हम किस तरह का समाज बनाना चाहते हैं? और उम्मीद यह है कि नई DSP कृष्णा कुमारी न्याय की उस मिसाल को स्थापित करेंगी, जहां पहचान नहीं, बल्कि सच्चाई और कानून की जीत होगी।"

मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड अंतर्गत महेशवाड़ा पंचायत के बेला गांव की बेटी कृष्णा कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद पर चयनित होकर पूरे मिथिलांचल और बिहार का गौरव बढ़ाया है। वर्तमान में बख्तियारपुर थाना में दारोगा के पद पर कार्यरत कृष्णा कुमारी की यह उपलब्धि लाखों युवाओं, विशेषकर ग्रामीण परिवेश की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

कृष्णा कुमारी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता श्री चन्द्रदेव सिंह एवं माता जी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पुत्री की शिक्षा, संस्कार और सपनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसी का परिणाम है कि आज उनकी पुत्री ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर बिहार प्रशासनिक सेवा में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।

बताया जाता है कि नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। लगातार संघर्ष और समर्पण के बल पर उन्होंने महज कुछ वर्षों में दारोगा से DSP बनने तक का गौरवपूर्ण सफर तय किया। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में स्थायी नहीं बन सकती।

कृष्णा कुमारी की सफलता पर पूरे बाबूबरही, मधुबनी और मिथिलांचल क्षेत्र में खुशी का माहौल है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों द्वारा उन्हें शुभकामनाएं दी जा रही हैं। लोग इसे क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा और उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि इस गौरवपूर्ण अवसर पर समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा होता है। जब कोई छात्र या छात्रा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में संघर्ष कर रहा होता है, आर्थिक, सामाजिक और मानसिक चुनौतियों से जूझ रहा होता है, तब उसके साथ खड़े होने वाले लोगों की संख्या बहुत कम होती है। लेकिन जैसे ही सफलता मिलती है, बधाई देने वालों की लंबी कतार लग जाती है।

समाज से सवाल यह है कि क्या हम केवल सफल लोगों के साथ खड़े होने के लिए बने हैं, या संघर्ष के दिनों में भी प्रतिभाओं का हाथ थामने की जिम्मेदारी हमारी है? यदि समाज संघर्ष के समय सहयोग और प्रोत्साहन दे, तो शायद और भी अधिक युवा अपने सपनों को साकार कर सकें।

वहीं, DSP पद पर चयनित कृष्णा कुमारी जी से क्षेत्र के लोगों की बड़ी अपेक्षाएं भी जुड़ी हुई हैं। समाज के विभिन्न वर्गों का मानना है कि पुलिस विभाग में निष्पक्षता और न्याय सर्वोपरि होना चाहिए। इस अवसर पर लोगों की ओर से एक विनम्र अपेक्षा भी व्यक्त की जा रही है कि वे अपने कार्यकाल में अपराधी और निर्दोष व्यक्ति के बीच निर्णय लेते समय केवल तथ्यों, साक्ष्यों और कानून को आधार बनाएं।

जनता की ओर से यह अनुरोध है कि न्याय की कसौटी पर किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, वर्ग या सामाजिक पहचान नहीं, बल्कि उसके कर्म और उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य ही निर्णायक हों। एक निष्पक्ष और संवेदनशील पुलिस अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल समाज में न्याय और विश्वास को और मजबूत करेगा।

कृष्णा कुमारी की यह सफलता न केवल उनके परिवार की जीत है, बल्कि पूरे क्षेत्र के संघर्षशील युवाओं और बेटियों के सपनों की भी जीत है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए समाज, राज्य और राष्ट्र की सेवा में नए कीर्तिमान स्थापित करें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती रहें।

Daroga Se DSP Tak: Babubarhi Ki Beti Krishna Kumari Ne Racha Itihas, Lekin Samaj Se Ek Bada Sawaal Bhi!
YHT Store, yuva hind trust 22 June 2026
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