📰 विस्तृत खबर
🛑 YHT24x7news का सीधा सवाल
जब बेटियां पढ़ने जाती हैं, परीक्षा देकर लौटती हैं और रास्ते में दरिंदगी का शिकार होती हैं —
तो सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी का है।
क्या जिम्मेदार लोग जवाब देंगे?
मधुबनी जिले के लौकही थाना क्षेत्र अंतर्गत पीपरौन गांव से एक शर्मनाक और चिंताजनक मामला सामने आया
है, जहां परीक्षा देकर स्कूल से घर लौट रही एक स्कूली छात्रा के साथ छेड़खानी की गई। जब छात्रा और उसकी सहेलियों ने इसका विरोध किया, तो बदमाशों ने छात्रा को बेल्ट से बेरहमी से पीट दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता मध्य विद्यालय कलुआही से परीक्षा देकर अपनी दो सहेलियों के साथ पैदल घर लौट रही थी। इसी दौरान एक बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे और लड़कियों के साथ अश्लील हरकतें व छेड़खानी करने लगे।
छेड़खानी से परेशान होकर जब छात्रा और उसकी सहेलियों ने युवकों का विरोध किया, तो बाइक सवार युवक आक्रोशित हो गए। आरोप है कि एक युवक बाइक से उतरकर पहले छात्रा के साथ हाथापाई करने लगा, फिर उसने बेल्ट निकालकर छात्रा की जमकर पिटाई कर दी।
घटना के दौरान छात्रा चीख-पुकार करने लगी, जिससे आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों को आता देख आरोपी युवक भागने लगे, लेकिन एक युवक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रा को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लौकही में भर्ती कराया गया, जहां उसका समुचित इलाज किया गया।
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय सामाजिक लोगों द्वारा पंचायत के माध्यम से मामला सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, न्यूज़ संकलन तक पीड़िता या उसके परिजनों की ओर से थाने में कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया था।
फिलहाल पुलिस पकड़े गए युवक से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना ने एक बार फिर स्कूली छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
YHT24x7news सवाल पूछता है
🔴 समाज से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
क्या हमारी बेटियां स्कूल से सुरक्षित घर भी नहीं लौट सकतीं?
छेड़खानी जैसी घटनाओं पर आज भी पंचायत से समझौते की सोच क्यों हावी है?
क्या अपराधियों को सामाजिक दबाव में छोड़ देना आने वाली पीढ़ी के लिए खतरा नहीं है?
ग्रामीण समाज में लड़कियों के विरोध को आज भी अपराध क्यों समझा जाता है?
क्या ऐसे मामलों में चुप्पी साधना, अपराधियों का मनोबल बढ़ाने जैसा नहीं है?
क्या पीड़िता की इज्जत केवल उसी की जिम्मेदारी है, समाज की नहीं?
🏛️ प्रशासन और पुलिस से जुड़े कड़े सवाल
छेड़खानी और मारपीट जैसे गंभीर मामले में अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं हुई?
क्या पंचायत के दबाव में कानूनी कार्रवाई को रोका जा रहा है?
क्या पुलिस की जिम्मेदारी केवल आरोपी को पकड़ना है, या पीड़िता को न्याय दिलाना भी?
स्कूल से आने-जाने वाले रास्तों पर पुलिस पेट्रोलिंग क्यों नहीं है?
क्या ऐसे मामलों में POCSO एक्ट या सख्त धाराओं पर विचार किया जा रहा है?
अगर आज सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी छात्रा के साथ यही घटना नहीं होगी?
⚖️ न्याय व्यवस्था से जुड़ा सवाल
क्या समझौता न्याय का विकल्प हो सकता है?
क्या अपराधी को माफ करना, पीड़िता के साथ दूसरा अपराध नहीं है?