📍 स्थान
फुलपरास (मधुबनी)
रिपोर्ट: राहुल कुमार प्रियदर्शी
📰 खबर (विस्तृत व विश्लेषणात्मक)
मधुबनी जिले के फुलपरास थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलकाही गांव में अतिक्रमण हटाने गई प्रशासनिक टीम पर हुए हमले के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। इस गंभीर मामले में 26 नामजद तथा 25 से 30 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ फुलपरास थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर लगातार छापेमारी की जा रही है।
घटना सोमवार 15 दिसंबर 2025, दिन के लगभग 12:30 बजे की है, जब फुलपरास के अंचलाधिकारी अजय चौधरी, बीपीआरओ सह दंडाधिकारी प्रगति कुमारी एवं भारी संख्या में पुलिस बल के साथ प्लस टू उच्च विद्यालय फुलकाही परिसर में अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे।
प्रशासन को सूचना मिली थी कि विद्यालय की भूमि पर कृपाल सहनी समेत करीब 14 लोगों द्वारा अवैध अतिक्रमण किया गया है। प्रशासनिक आदेश के तहत JCB मशीन से कच्चे-पक्के निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रारंभ में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और कुछ लोग स्वयं भी अतिक्रमण हटाने लगे।
लेकिन इसी दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आक्रोशित भीड़ ने अंचलाधिकारी को खदेड़ दिया और पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।
इस हमले में
पुलिसकर्मी उचित पासवान,
पुलिसकर्मी शिवृति कुमारी,
JCB चालक श्याम सुंदर मंडल
गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज कराया गया।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकारी कार्य में बाधा, हमला और दंगा फैलाने जैसी धाराओं में 26 नामजद और 25-30 अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
🔍 विश्लेषण
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सरकारी भूमि और शैक्षणिक संस्थानों की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर स्थानीय स्तर पर कितनी बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने खड़ी है।
जहां एक ओर प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भीड़ की हिंसा और पदाधिकारियों पर हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के राज पर सीधा प्रहार है।
❓ कुछ कड़े सवाल (जनहित में)
क्या विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण की जानकारी पहले से थी?
क्या अतिक्रमण हटाने से पहले पर्याप्त संवाद और तैयारी की गई थी?
प्रशासनिक टीम की सुरक्षा व्यवस्था क्या पर्याप्त थी?
दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा/सरकारी काम में बाधा जैसी सख्त धाराएं क्यों न लगें?
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस योजना है?
Our latest content
Check out what's new in our company !