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प्रशासन की तानाशाही? करणी सेना नेता वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ दुर्व्यवहार पर राजपूत समाज का गुस्सा

करणी सेना और क्षत्रिय समाज ने पुलिस कार्रवाई को बताया असंवैधानिक, दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज
16 November 2025 by
प्रशासन की तानाशाही? करणी सेना नेता वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ दुर्व्यवहार पर राजपूत समाज का गुस्सा
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🔥 YHT24x7NEWS EXCLUSIVE REPORT 🔥

**छत्तीसगढ़ में करणी सेना प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ अमानवीय व्यवहार!

क्षत्रिय समाज में आक्रोश — “क्या ठाकुर होना अब अपराध है?”**

छत्तीसगढ़ में करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष और प्रतिष्ठित कारोबारी श्री वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ प्रशासन द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार ने पूरे राज्य में तीखी प्रतिक्रिया और गहरी चिंता पैदा कर दी है।

राजपूत–क्षत्रिय समाज ने इस घटना को लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला, जातिगत द्वेष, और राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

🟥 मामला क्या है? — पूरा विवरण

कथित तौर पर पुलिस ने वीरेंद्र सिंह तोमर को गिरफ्तारी के बाद

  • फटी बनियान में,
  • लड़कड़ाते कदमों के साथ,
  • चारों ओर पुलिस घेरे में,
  • जुलूस जैसा दृश्य बनाकर,

सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश की।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाज और करणी सेना में भारी गुस्सा फैल गया है।

समाज का आरोप है कि—

“ऐसा व्यवहार तो नक्सलियों के साथ भी नहीं किया जाता, लेकिन एक प्रतिष्ठित क्षत्रिय नेता को राजनीतिक कारणों से बेइज्जत किया जा रहा है।”

🟧 तोमर परिवार पर आरोप क्या हैं? समाज का पक्ष क्या है?

पुलिस का दावा है कि उन पर कई मामले दर्ज हैं।

लेकिन समाज का आरोप साफ है कि यह सभी राजनीतिक द्वेष और स्थानीय-बाहरी राजनीति का परिणाम है।

समाज इसे सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग बताता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि—

“जिले में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और समाजसेवा कुछ नेताओं को रास नहीं आई। इसलिए उन्हें अपराधी दिखाने की कोशिश की जा रही है।”

🟥 करणी सेना और क्षत्रिय समाज में एकजुटता

छत्तीसगढ़ करणी सेना ने इसे

  • लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान,
  • मानवीय अधिकारों का उल्लंघन
  • और राजपूतों को टारगेट करने की रणनीति बताया है।

संगठन का बयान:

“यदि सम्मानित क्षत्रिय नेता के साथ यह हो सकता है, तो कल किसी भी आम नागरिक के साथ ऐसा दुर्व्यवहार सम्भव है।"

🟩 राजपूत समाज का सवाल — “क्या ठाकुर होना अपराध है?”

राजपूत समाज ने सीधा सवाल उठाया है—

  • क्या क्षत्रिय होना देश में अपराध है?
  • क्या ठाकुर व्यक्ति को देखते ही प्रशासन आतंकवादी समझ लेता है?
  • नक्सलियों को लाखों रुपये देकर पुनर्वास करने वाली सरकार एक प्रतिष्ठित व्यापारी को अपमानित क्यों कर रही है?

समाज ने यह भी कहा कि—

“यह तानाशाही नहीं तो क्या है? प्रशासन कानून को ताक पर रखकर जिस तरह व्यवहार कर रहा है, उससे साफ दिख रहा है कि किसी विशेष समाज को टारगेट किया जा रहा है।”

🟧 समाज ने चेतावनी दी — “आज तोमर बंधु हैं, कल कोई और होगा”

राजपूत समाज ने स्पष्ट कहा—

“यदि आज हम चुप बैठे रहे, तो कल यही अत्याचार किसी और परिवार पर होगा।

एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और मौन रहना सबसे बड़ा अपराध।”

🟦 सरव समाज से समर्थन की अपील

करणी सेना ने सभी सामाजिक वर्गों से अपील की है—

  • न्याय की आवाज में साथ दें
  • राजनीतिक प्रताड़ना को रोकें
  • प्रशासन से जवाब मांगें
  • सामाजिक एकता और संवैधानिक अधिकारों के लिए खड़े हों

समाज का संदेश:

“कानून अपना काम करे… लेकिन किसी भी व्यक्ति का अपमान हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

🟥 YHT24x7NEWS की मांग

हमारी ओर से प्रशासन और सरकार से सवाल:

  • क्या यह संवैधानिक है?
  • क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है?
  • क्या यह जातिगत भेदभाव और राजनीतिक टारगेटिंग नहीं है?
  • क्या प्रशासन अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है?

🟧 निष्कर्ष — यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, समाज की अस्मिता का प्रश्न है

यह मामला केवल वीरेंद्र सिंह तोमर का नहीं—

यह पूरे क्षत्रिय समाज की गरिमा, सम्मान और अस्तित्व का मुद्दा बन गया है।

समाज एकजुट है, और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

करणी सेना और राजपूत समाज ने साफ शब्दों में कहा है—

“जिन राजपूतों ने अन्याय के समय चुप्पी साधी, आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें कभी माफ़ नहीं करेंगी।”

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