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बिहार में दो बड़े नरसंहार: एक ओर यादव युवक की निर्ममता, दूसरी ओर राजपूत समाज के 7 लोगों की हत्या

पूर्वी चंपारण और सीवान में दो समुदायों को निशाना बनाकर की गई वीभत्स हिंसाएं, पूरे राज्य में तनाव का माहौल; प्रशासन, सरकार और समाज की भूमिका पर उठ रहे सवाल
5 July 2025 by
बिहार में दो बड़े नरसंहार: एक ओर यादव युवक की निर्ममता, दूसरी ओर राजपूत समाज के 7 लोगों की हत्या
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📜 विस्तृत समाचार (Full News):

बिहार की धरती एक बार फिर दो वीभत्स और क्रूर घटनाओं से दहल उठी है। राज्य के दो अलग-अलग जिलों – पूर्वी चंपारण और सीवान – से दो सामुदायिक हिंसा की खबरें सामने आई हैं, जिनमें यादव और राजपूत समाज के लोग क्रमशः पीड़ित हैं।

📍 पूर्वी चंपारण: 16 वर्षीय यादव युवक के साथ क्रूरता

ढाका अनुमंडल क्षेत्र से आई एक चौंकाने वाली घटना में राजा यादव, उम्र महज 16 वर्ष, को उधार की ईंट के विवाद में बुरी तरह से शिकार बनाया गया।

राजा के पिता विजय यादव, एक ईंट चिमनी के संचालक हैं, जिन्होंने शेख बहादुर नामक व्यक्ति से बकाया रकम की मांग की थी। यह मामूली मांग इतनी बड़ी हिंसा में बदल गई कि शेख बहादुर, उसके दोनों पुत्र नेयाज और नेहाल, और दो अन्य आरोपी सलीम और करिमुल्लाह ने मिलकर राजा यादव को स्कॉर्पियो में अगवा कर अपने घर ले जाकर उसके दोनों हाथ बेरहमी से काट दिए।

इस अमानवीयता की तस्वीरें सामने आने के बाद भी अब तक किसी भी बड़ी पार्टी ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे आक्रोश फैलता जा रहा है।

📍 सीवान: कौरिया गांव में 7 राजपूतों की सामूहिक हत्या

सीवान जिले के महाराजगंज विधानसभा के भगवानपुर ब्लॉक स्थित कौरिया गांव में दशकों पुराने जमीन विवाद ने भयानक हिंसा का रूप ले लिया।

यहां तलवार और गोली से लैस हमलावरों ने राजपूत समाज के 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। आरोप है कि हमला भूमिहार समाज के लोगों द्वारा किया गया। घटना स्थल मलमलिया क्षेत्र को अस्थायी तौर पर छावनी में बदल दिया गया है।

इस नरसंहार को मीडिया 'जातीय वर्चस्व की लड़ाई' के रूप में दिखा रही है, जबकि यह घटना दोनों पक्षों के वर्षों पुराने विवाद का नतीजा है।

⚖️ राजनीतिक और सामाजिक चुप्पी पर सवाल

दोनों घटनाओं में पीड़ित पक्ष दो अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं – राजपूत और यादव। दुख की बात यह है कि इन अत्यंत क्रूर घटनाओं पर ना तो महागठबंधन खुलकर बोल रहा है, और ना ही विपक्ष ने अभी तक कोई ठोस हस्तक्षेप किया है

इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि जब तक राजनीतिक लाभ की संभावना नहीं होती, तब तक पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं होती।

📢 अपील: हिंसा नहीं, न्याय चाहिए

हम सभी से आग्रह करते हैं कि इन घटनाओं को जातीय रंग देने के बजाय इंसानियत के नजरिए से देखा जाए। हर समाज में पीड़ित हैं, और हर समाज को न्याय की आवश्यकता है।

राजनीतिक दलों, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर पीड़ित परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

बिहार में दो बड़े नरसंहार: एक ओर यादव युवक की निर्ममता, दूसरी ओर राजपूत समाज के 7 लोगों की हत्या
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