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लाल किला चमकता रहा, पर एक घर अंधेरे में डूब गया | अमर कटारिया की भावनात्मक कहानी

दिल्ली के लाल किले की रौशनी के बीच, एक परिवार की ज़िंदगी अंधेरे में डूब गई। पढ़िए अमर कटारिया की सच्ची और भावनात्मक कहानी — एक पिता, पति और बेटे की जो अब यादों में ज़िंदा है।
13 November 2025 by
लाल किला चमकता रहा, पर एक घर अंधेरे में डूब गया | अमर कटारिया की भावनात्मक कहानी
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🟥 लाल किला चमकता रहा, पर एक घर अंधेरे में डूब गया

दिनांक: सोमवार, 10 नवंबर

स्थान: दिल्ली, चांदनी चौक

श्रेणी: मानवता / समाज / प्रेरक कहानियाँ

🕯️ एक आम आदमी की असामान्य कहानी – अमर कटारिया

दिल्ली की ठंडी शाम थी। लाल किला अपनी रौशनी में जगमगा रहा था, और भीड़-भाड़ से भरी चांदनी चौक की गलियों में ज़िंदगी अपने रंग में बह रही थी।

उसी भीड़ में एक नाम था — अमर कटारिया, एक साधारण युवक, जो दिन भर लोगों की सेवा कर घर लौट रहा था।

रोज़ की तरह मुस्कुराते हुए उसने अपनी बाइक स्टार्ट की और फोन पर पत्नी से कहा —

“बस पाँच मिनट में घर पहुँच रहा हूँ, आरव को सरप्राइज दूँगा — उसकी पसंदीदा कार वाला खिलौना।”

पत्नी कृति ने हँसते हुए कहा —

“जल्दी आओ, मॉम-डैड भी आए हैं।”

पर उस रात किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था...

💥 एक धमाका जिसने सब बदल दिया

कुछ ही मिनट बाद, दिल्ली की सड़कों पर एक ज़बरदस्त धमाका हुआ।

आसमान थम गया, सन्नाटा छा गया, और लोगों की ज़िंदगी बदल गई।

रात दो बजे अस्पताल से एक फोन आया —

“सर, एक युवक मिला है… उसके बाजू पर टैटू लिखा है — ‘Mom My First Love, Dad My Strength, Kriti…’ क्या ये आपका कोई है?”

उस पल जगदीश कटारिया के हाथ से फोन गिर गया।

आँखों से आँसू, दिल में सिसकियाँ… बस एक ही नाम —

“मेरा अमर…”

🕊️ एक पिता का माथा, बेटे के माथे पर झुक गया

सुबह चार बजे तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

अस्पताल के कमरे में अमर का चेहरा शांत था — जैसे मुस्कुराकर कह रहा हो,

“मैं अभी भी यहीं हूँ…”

पत्नी कृति ने बेटे आरव को गोद में लिया और कहा —

“देख बेटा, पापा सो रहे हैं।”

मासूम आरव ने पापा का चेहरा थपथपाया —

“पापा उठो ना… कार…”

बस उस पल घर की दीवारें रो पड़ीं।

💔 अब घर में सन्नाटा, और यादें ही साथी हैं

अगले दिन घर के बाहर बाइक खड़ी थी,

हेलमेट में बस उसकी खुशबू रह गई थी।

कृति हर शाम लाल किले की रौशनी देखती है और बेटे से कहती है —

“वो देखो बेटा, वहाँ पापा स्टार बन गए हैं।”

पर आरव आज भी पूछता है —

“मम्मा, पापा फिर कब आएंगे?”

और कृति की आँखों में बस एक खामोश सवाल तैरता है —

“क्या वो सच में लौटेंगे?”

🌠 कुछ लोग चले जाते हैं, पर अमर हो जाते हैं

अमर कटारिया अब एक नाम नहीं — एक भावना है।

उसकी हँसी दीवारों में गूँजती है,

उसकी बाइक अब गवाह है उस शाम की,

जब एक मुस्कुराता इंसान आतंक के साए में खो गया।

आरव बड़ा होगा, और जब पूछेगा —

“मम्मा, पापा कहाँ हैं?”

तो शायद कृति मुस्कुराकर कहेगी —

“वो ऊपर से हमें देख रहे हैं, बेटा…”

पर उसकी मुस्कान में हमेशा रहेगा वो दर्द —

क्योंकि कुछ आवाज़ें कभी लौटकर नहीं आतीं।

🙏 अमर कटारिया को श्रद्धांजलि 🙏

“वो गए नहीं, वो बस आसमान में एक तारा बन गए हैं — जो हर रात अपने घर को रोशनी देता है।”

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लाल किला चमकता रहा, पर एक घर अंधेरे में डूब गया | अमर कटारिया की भावनात्मक कहानी
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